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| INTERVIEW |
मिलिये दिल्ली गान के रचयिता सुमित प्रताप सिंह से
आपको पता है कि दिल्ली की स्थापना किसने की थी? नहीं पता? आइए इतिहास के पन्नों की तलाशी लेते हैं। महाभारत युद्ध की पृष्ठ भूमि तैयार हो रही है। कौरवों ने पांडवों को चालाकी से खांडवप्रस्थ देकर निपटा दिया है। कौरवों के अन्याय को सहते हुए पांडवों ने अपने कठिन परिश्रम से खांडवप्रस्थ को इंद्रप्रस्थ बना दिया है। इस प्रकार इन्द्रप्रस्थ के रूप में दिल्ली के पहले शहर की स्थापना हो चुकी है। महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका है और अश्वत्थामा अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र छोड़कर अट्ठाहास कर रहा है, किन्तु जिस पर प्रभु श्री कृष्ण का आशीष हो, तो भला उसका कोई क्या बिगाड़ सकता है। श्री कृष्ण के आशीर्वाद से उत्तरा के गर्भ से उत्पन्न मृत बालक जीवित हो उठता है. बालक का नाम रखा जाता है परीक्षित (दूसरे की इच्छा से जीवित होने वाला)। आगे बढ़ते हैं। मध्यकाल का समय है। उन्हीं राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय के वंशज अनंगपाल तोमर के स्वप्न में माता कुंती आती हैं और इंद्रप्रस्थ या कहें दिल्ली को राजधानी बनाकर अपने पूर्वजों का गौरव फिर से लौटाने का उनसे आग्रह करती है। आइए वापस आधुनिक काल में लौट आते हैं। उसी तोमर वंश का एक युवा अपने पूर्वजों की कर्मभूमि दिल्ली के लिए दिल्ली गान की रचना करता है। जी हाँ बात कर रहे हैं सुमित प्रताप सिंह की। सुमित प्रताप सिंह एक प्रसिद्द हिन्दी ब्लॉगर हैं और हाल ही में दैनिक जागरण की "मेरा शहर मेरा गीत" नामक प्रतियोगिता में सुमित प्रताप सिंह का गीत कुछ खास है मेरी दिल्ली में चुना गया है जो अब दिल्ली गान बन गया है।
यहां इस बात का उल्लेख करते खुशी हो रही है कि सुमित प्रताप सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के ग्राम लालपुरा में हुआ। प्राथमिक शिक्षा इटावा और दिल्ली में हुई और शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्व विद्यालय से इतिहास से स्नातक किया। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही दिल्ली पुलिस में भर्ती हो गये। यह कवि तो बचपन से ही थे, किन्तु पुलिस की कठिन ट्रेनिंग ने इन्हें हास्य कवि बना दिया। मई, 2008 से 'सुमित के तड़के' नामक ब्लॉग पर शब्दों के तड़के लगाने शुरु कर दिये। 2012 का साल इनके लिए सौभाग्य लेकर आया और इनका गीत "कुछ ख़ास है मेरी दिल्ली में" दिल्ली गान चुना गया। ऐसे में आइए बाकी बचा-खुचा इन्हीं से पूछने के लिए इटावा लाइव के विशेष आग्रह पर नई दिल्ली में ही युवा लेखिका और इटावा की पुत्री संगीता सिंह तोमर ने इनका साक्षात्कार लिया।
संगीता सिंह तोमर- सुमित प्रताप सिंह जी नमस्कार! कैसे हैं आप?
सुमित प्रताप सिंह- नमस्कार! मैं ठीक हूँ। आप कैसी हैं?
संगीता सिंह तोमर- जी आपकी कृपा से बिलकुल ठीक हूँ। कुछ प्रश्न लाई हूँ आपके लिए।
सुमित प्रताप सिंह- अभी तक तो आप अपनी ही प्रश्नों की पोटली टाँगे फिरते रहते थे। अब आपने यह जिम्मेदारी संभाल ली. चलिए जो पूछना है पूछ डालिए।
संगीता सिंह तोमर- सबसे पहले तो आपको दिल्ली गान लिखने के लिए बधाई। आपका गीत दिल्ली गान बन चुका है। अब आपको कैसा अनुभव हो रहा है?
सुमित प्रताप सिंह- शुक्रिया। मुझे बहुत अच्छा अनुभव हो रहा है। मैं अपनी दिल्ली के लिए कुछ कर पाया, इस बात का मुझे संतोष है।
(धर्मराज युधिष्ठिर अपने वंशज अनंगपाल तोमर के संग सूरज कुंड में स्नान करते हुए दिल्ली गान गा रहे हैं।)
संगीता सिंह तोमर- आप लिखते क्यों हैं?
सुमित प्रताप सिंह- लोग अक्सर पूछते हैं कि मैं क्यों लिखता हूँ। लिखना मेरे जीवन जीने का तरीका है और मैं जीने के लिए लिखता हूँ। सोचता हूँ यदि मैं लिखता नहीं होता, तो शायद मैं अब तक नहीं होता। अपने जीवन में मिली निराशा और असफलता से जूझने का हथियार है मेरा लेखन। मैं विवशता में नहीं लिखता। जब मन करता है तो लिखता हूँ और मन लिखने को मना करे तो बिल्कुल नहीं लिखता। मैं उस भीड़ का हिस्सा बनने से बचता हूँ, जो बिना बात में निरंतर लिखती रहती है। मेरे मन से जब आवाज आती है, तभी मैं लिखता हूँ। मुझमें भी छपास की चाहत है, किन्तु यह दीवानगी की हद तक नहीं है। मेरे लिखने का मकसद है, कि मेरे लिखने से समाज को कुछ मिले। जब समाज मेरे लिखने से कुछ पा सकेगा तभी समझूंगा मैं वाकई में लिखता हूँ।
(महाबली भीम अपने पोते परीक्षित के साथ इन्द्रपस्थ किले या कहें कि दिल्ली के पुराने किले के पीछे स्थित प्राचीन भैरव मंदिर में दिल्ली गान गाने में मस्त हैं।)
संगीता सिंह तोमर आपको ब्लॉग लेखन का रोग कब और कैसे लगा?
सुमित प्रताप सिंह ब्लॉग लेखन का रोग एक कन्या के माध्यम से लगा। आज चार वर्ष होने को हैं। वह कन्या तो जाने किस लोक में लोप हो गई, किन्तु मुझ पर यह रोग पूरी तरह अधिकार जमा चुका है।
(धनुर्धर अर्जुन अपने पड़पोते जनमेजय के संग इन्द्रप्रस्थ किले की प्राचीर पर खड़े हो अपने बाणों से आकाश में कुछ खास है मेरी दिल्ली में लिख रहे हैं।)
संगीता सिंह तोमर आपकी लेखन में सर्वाधिक प्रिय विधा कौन सी है?
सुमित प्रताप सिंह -लेखन में मेरी सर्वाधिक प्रिय विधा व्यंग्य है, किन्तु गीत, कविता व लघुकथा लेखन भी प्रिय विधाएँ हैं, जो कि मेरे हृदय में बसती हैं।
(माता कुंती नकुल और सहदेव संग इन्द्रप्रस्थ किले में स्थित कुंती मंदिर में बैठी हुईं दिल्ली गान गुनगुना रही हैं।)
संगीता सिंह तोमर आप अपनी रचनाओं से समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं?
सुमित प्रताप सिंह- संदेश? इस देश में भला कोई संदेश पर ध्यान देता है क्या? फिर भी मैं इस कोशिश में रहता हूँ, कि मेरी रचनाओं से समाज को संदेश मिले, कि जीवन छोटा सा है इसलिए इसे हँसते-मुस्काते बिताया जाये। समाज में फैली कुरीतियों को सोटा जमाने के लिए अब तो उठ कर खड़ा हो लिया जाए। हर इंसान एक बात सोचे, कि उसने इस देश व समाज से जितना लिया है, कम से कम उसका 10 प्रतिशत तो लौटाने का प्रयास करें।
(तोमर वंश के कुल देवता श्री कृष्ण अपनी बांसुरी पर दिल्ली गान की धुन बजा रहे हैं। अरे देखिए उनके साथ आकाश में तोमरों के सभी पूर्वज एकत्र हो, अपने वंशज सुमित प्रताप सिंह को अपना आशीष दे रहे हैं।)
संगीता सिंह तोमर एक अंतिम प्रश्न क्या हिंदी कभी विश्व की बिंदी बनेगी?
सुमित प्रताप सिंह- हिंदी अवश्य ही विश्व की बिंदी बनेगी और एक न एक दिन स्वाभिमान से तनेगी। हम सभी हिंदीपूत ब्लॉगर तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक इसे इसका हक न दिला दें .....जय हिंद, जय हिंदी और जय दिल्ली!
(इतना कहकर सुमित प्रताप सिंह दिल्ली गान "कुछ ख़ास है मेरी दिल्ली में" गाने लगे और मैं भी उनके साथ सुर में सुर मिलाने लगी।)
लेखिका-
पता- ई-1/4, डिफेन्स कालोनी पुलिस फ्लैट्स, नई दिल्ली-49
मूल निवासी- ग्राम लालपुरा, इटावा.
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| Report :-
संगीता सिंह तोमर ( नई दिल्ली) Date :-
04 अप्रैल 2012 |
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| बडी खबर |
दूसरी दुनिया: जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर?
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व्यंग्य: रंदाः अंतरिक्ष में अब वामपंथी विचार,झंडा और कार्यालय
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पेंशनर सी0वी0एस0 बैंक खाता खुलवाकर जानकारी दें
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सरकारी प्रेस नोट
इटावा - जिला समाज कल्याण अधिकारी एन.पी.गुप्त ने बताया कि अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक और डाकघरों में वृद्धावस्था पेंशन के संचालित खातों को अविलम्ब नजदीकी सी0वी0एस0 बैक शाखा में खोला जाना है। ऐसे पेंशनर अपने खाते खुलवाकर शीघ्र समाज कल्याण कार्यालय में सूचना देवें। अन्यथा पेंशन बन्द की जा सकती है और प्रतीक्षा सूची से नये आवेदकों को पेंशन स्वीकृत कर देने पर पुनः पेंशन स्वीकृत नहीं हो पायेगी। इसके लिए पेंशनर स्वयं.....
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| बधाई सन्देश |
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समस्त जनपद वासियों को होली की हार्दिक शुभ कामनाएं
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इटावा
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समस्त जनपदवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
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डा० लक्ष्मीपति वर्मा (अध्यक्ष के०के०डी०सी०इटावा)
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समस्त जनपदवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
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अतुल मिश्रा, युवा नेता समाजवादी पार्टी
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धर्मेन्द्र मिश्रा प्रबन्ध निदेशक बाबा द माल इटावा
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संजय शुक्ला , प्रबन्ध निदेशक बाबा द माल इटावा
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कृष्ण मुरारी गुप्ता , नेता समाजवादी पार्टी
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समस्त जनपदवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
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अजय कुमार, संवातदाता इटावा लाइव
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समस्त जनपदवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
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गुलशन कुमार संपादक, इटावा लाइव
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समस्त जनपदवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
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Ashish Bajpai, Director- Webs4media, 9412182324
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समस्त जनपदवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
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मनीष कुमार SK INDIA LTD. 09808249301
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प्रताप श्रीवास्ताव, वरिष्ठ समाजसेवी
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समस्त जनपदवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
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रनवीर सिंह यादव, रायल आक्संफोर्ड एकेडमी, इटावा
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विवेक यादव, चेयरमैन, एसएमजीआई ग्रुप
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समस्त जनपदवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
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विकास गुप्ता, समाजवादी पार्टी
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प्रेमदास कठेरिया, सांसद इटावा
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| जॉब
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| खरीदें बेचें |
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